Saturday, November 19, 2016

नहीं होते

यूँ तो लिखते बहुत हैं शेर सब सच्चे नहीं होते
जो बाहर से भले दिखते हैं सब अच्छे नहीं होते।।

जो लिखते हैं सियाही से मोहब्बत की इबारत को
कुछ एक शायर भी होते हैं सभी बच्चे नहीं होते।।

मोहब्बत तो मोहब्बत है किसी से हो ही जाती है
पर उसके नाम के लिख्खे कहीं पर्चे नहीं होते।।

पिता जो भी है लाता घर में मेहनत की कमाई से
वो बच्चों पर लुटाता खुद पे कुछ खर्चे नहीं होते।।

वफादारी का होता कत्ल है गंदी सियासत में
कि कुर्सी की लड़ाई में कोई अपने नहीं होते।।

जीवन का यही तो अर्थ है ये ही तो मतलब है
खुशी की रात भी आती है केवल गम नहीं होते।।

ये महफिल मौत की है एक ना एक दिन आओगे 'आखिर'
अमीरी और गरीबी के यहाँ चर्चे नहीं होते।।

।।आखिर।।

2 comments: