Friday, January 29, 2016

जिंदगी के गमों को कुछ ऐसे धो देते हैं
जब कभी खुश होते हैं रो देते हैं।।

ना पूछो कैसे बिताते हैं लम्हे उनके बगैर
जब उनकी याद आती है सो लेते हैं।।
।।आखिर।।

Tuesday, January 5, 2016

खुशनसीब हुँ।।

खुशनसीब हुँ शहीद हुआ सरहद पर
पर मेरी मौत को तुम ऐसे तो रुसवा ना करो।

ढूंढना बंद करो मेरे नाम में मजहब
मेरी मैयत पे तो तुम ऐसे सियासत ना करो।

नहीं है शौख मिले कोई पुरस्कार मुझे
ध्यान रखना मेरे घर में कभी आँसू ना गिरे।

कभी लौटाए ना पदक कोई मेरी खातिर
देखना देश मेरा ये असहिष्णु ना बने।।

मैं तो मर ही गया पर एक है ख्वाहिश "आखिर"
मेरे जैसा नहीं अगली दफा कोई भी मरे।।

।।आखिर।।

Saturday, January 2, 2016

हम तेरी मोहब्बत में महसूस ये करते हैं।

हम तेरी मोहब्बत में महसूस ये करते हैं
थे जिंदा अभी तक हम अब जिंदगी जीते हैं।।

ना जाने इन आँखों ने क्या जादू किया हम पर
हम भूल गए खुद को बस याद तू रहती है।।

हर रात तू आती है ख्वाबों में मेरे ऐसे
जैसे कोई शहज़ादी चंदा से उतरती है।।

ना जाने हुआ क्या है जब से हूँ मिला तुमसे
अब आप ही सर मेरा तेरे सजदे में झुकता है।।

तेरे प्यार ऐ साहिब ना जाने क्या जादू है
मेरी गज़लों में अब बरबस तेरा रूप झलकता है।।

जब से तुम्हें देखा है इन आँखों ने ऐ जानम
तब से इन आँखों को कोई और ना जचता है।।

ना जाने हुआ क्या है मेरी ख्वाहिशों को "आखिर"
तेरी ख्वाहिशों के आगे चुपचाप ये रहती हैं।।

।।आखिर।।