Friday, October 30, 2015

चाँद का इंतजार

ऐ चाँद आज मेरी एक हसरत पूरी कर दे
ज़रा निकल कर बादलों से मेरा चाँद भी रोशन कर दे।

वो भूखा है सुबह से मेरे प्यार मे
कुछ मुरझा सा गया है तेरे इंतजार में
अब देर ना कर ना सता उसे
आ जा फलक पर बादलों को चीर के
ऐसे मिल कि उसकी तपस्या पूरी कर दे
ऐ चाँद! मेरा चाँद रोशन कर दे।।

यूँ तो मैं भूखा नहीं हूँ सुबह से
जरा सा खा रखा है
उसने प्यार से जो सेंकी थी रोटियां तवे पर
उसका लुत्फ उठा रखा है
पर फिर भी बेचैन हूँ मै उससे ज्यादा
क्योंकि तूने ऐ चाँद उसे अब तक भूखा रखा है
बस ना कर अब और शैतानी तू और आ जा सामने
तुझे देख कर वो अपना जी भर ले
कुछ खा ले हँस ले और खुद को झिलमिल कर ले
ऐ चाँद! मेरा चाँद रोशन कर दे।।

।।आखिर।।