Thursday, August 20, 2015

अब तक कोई शिकायत ना थी तुझसे ऐ जिन्दगी
फिर कल उसे देखा और प्यार हो गया।।

जो कल तक धड़कता था सीने में मेरे
वो दिल आज सर पर सवार हो गया।। 

ना कुछ करता है ना कुछ करने देता है
जाने क्या धुन इसपर सवार हो गया।।

मेरी सारी दुआ हो गई बेअसर, क्या करूं
ये जाने कैसा बीमार हो गया।।

हर पल हर लम्हा बस कहता रहता है कि
ज्यादा मत सोच "आखिर"तुझे भी प्यार हो गया।।

।।आखिर।।

Saturday, August 15, 2015

मैं भारत माता हूँ

अदभुत अनमिट अमर अटल जनजीवन की अभिलाषा हूँ
लोकतंत्र की पराकाष्ठा मैं तो भारत माता हूँ।।

मैं आशा हूँ उस गरीब की जिसके पास दुकान नहीं
जो रहता है भूखा-नंगा जिसके पास मकान नहीं
जो अपना जीवन सारा मजदूरी में खो देता है
जाडा गर्मी या हो बारिश कभी नहीं जो सोता है
जिसकी आँखों में उसके बच्चों के सपने जीते हैं
उनको खुशियां देने को जो हर गम हँस के पीते हैं
मैं इन सबके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आशा हूँ
लोकतंत्र की पराकाष्ठा मैं तो भारत माता हूँ।।

मैं आशा उन बच्चों की जिनका कहीं घर खो जाता है
जिनके ना होते माता-पिता सडकों पर रात बिताता है
जो दिनभर मजदूरी कराता है या फिर भीख कमाता है
और इन सबके बीच कहीं जिसका बचपन खो जाता है
मैं उन बच्चों के भी पढ़ने-लिखने की अभिलाषा हूँ
लोकतंत्र की पराकाष्ठा मैं तो भारत माता हूँ।।

मैं आशा उन लोगों की जो मंदिर-मस्जिद जाता है
जो कुरान के कलमे पढता ईश्वर के गुण गाता है
जो नहीं देखता धन और दौलत धरम करम के नाम पर
खुद खाता सूखी रोटी ईश्वर को दूध चढ़ता है
जो अपनी मंजिल को जन्नत या फिर स्वर्ग बताता है
जिसके नाम पर इनको नेता-धर्मगुरू बहकाता है
फिर फिजूल की रंजिश में जो आपस में टकराता है
कभी-कभी ये एक-दूजे का सर्वनाश कर जाता है
मैं इनके भी भीतर ज़िंदा एक अमन की आशा हूँ
लोकतंत्र की पराकाष्ठा मैं तो भारत माता हूँ।।

मैं आशा उस सेनानी की जिसने सब कुछ त्याग दिया
मुझे स्वतंत्र करने की कोशिश में प्राणों को त्याग दिया
मै आशा हूँ उस "गाँधी" की जो गरीब पर मारता था
सत्य अहिंसा सत्याग्रह कर अंग्रेजों से लडता था
मैं आशा हूँ उस "कलाम" की जो मेरी सेवा करता
मैं सशक्त बनू इसकर के नित नये प्रयोजन कराता था
मैं आशा हूँ उस जवान की जो सीमा पर लडता है
मैं स्वछंद रहूँ इस खातिर अथक परिश्रम करता है
गंगा जमुनी की तहजीब में जन्मी प्यार की भाषा हूँ
लोकतंत्र की पराकाष्ठा मैं तो भारत माता हूँ।।

।। अाखिर।।