Tuesday, September 30, 2014

भूल जाता हूँ

तुझे मैं देखता हूँ और सब कुछ भूल जाता हूँ
के हूँ कौन मैं ये बात अक्सर भूल जाता हूँ ॥

ये तेरी अदाओं का जादू 'काला' ही तो है कि
इनमे फंस कर मैं दुआओं का असर भूल जाता हूँ ॥

ये तेरी कजरारी काली जो झील सी आँखें हैं
मैं इनमे डूबकर हर एक मंज़र भूल जाता हूँ ॥

तेरा ये खुशनुमा चेहरा तेरी ये मीठी सी बातें
मैं इनमे डूबकर सारे ग़मों को भूल जाता हूँ ॥

तेरे गेसुओं की काली घनी छाँव में आकर
मैं चिलचिलाती धूप का असर भूल जाता हूँ ॥

अँधेरी रात के साये में चमचम करती ये बिंदी
मैं इसकी जगमगाहट में सितारे भूल जाता हूँ ॥

तेरा यौवन की जिसने कल ही अठरह साल देखा है
मैं उसके एक नज़ारे पे 'नज़ारे' भूल जाता हूँ ॥

बड़ी फुरसत से उस रब ने उकेरा है तेरे तन को
तेरे आगे मैं खजुराहो की मूरत भूल जाता हूँ ॥

॥आखिर॥

Sunday, September 28, 2014

ज़िन्दगी में बड़ी मुश्किल से वो मुकाम आता है
जब अपना भी लहू अपने वतन के काम आता है
और जो कर गए ज़िन्दगी को रुसवा इस वतन की खातिर
उन शहीदों में अव्वल "भगत" का नाम आता है ॥

॥आखिर॥

Tuesday, September 23, 2014

जाने क्या बात है ?

वो दूर जा रही है अब ! जाने क्या बात है ?
नज़रें चुरा रही है अब ! जाने क्या बात है ?
जो कल तलक हर राज़ बयां करती थीं मुझसे
कुछ तो छुपा रहीं हैं अब ! जाने क्या बात है ?

हूँ मैं वही अब भी मगर ! जाने क्या बात है ?
है प्यार का सफर वही , जाने क्या बात है ?
अब भी धधक रही है इधर आग प्यार की
है बुझ रही शमा उधर , जाने क्या बात है ?

हैं दिन मेरे गुमनाम अब , जाने क्या बात है ?
हैं रातें भी सुनसान अब , जाने क्या बात है ?
करता हूँ आज भी मैं चाँद से तेरी बातें
है खुद पे ही विश्वास काम , जाने क्या बात है ?


॥आखिर॥ 

Thursday, September 18, 2014

बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है

बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है
मैं एक सपने का राजा हूँ तू उस सपने की रानी है
बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है ॥

वो सपना ,
जहां के हर नज़ारे बस तेरी तारीफ करते हैं
जहाँ सूरज भी तारों सा तेरे पीछे चमकता है
जहाँ सुबह तेरी अंगड़ाइयां के संग उठती है
जहाँ रातें तेरी जुल्फों के साये  सिमटती है
तू उस सल्तनत की शाहज़ादी , मेरी रानी है
बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है ॥

जहाँ सुबह तेरी पायल की बूंदों सी छनकती है
जहाँ की ये हवाएँ तेरी साँसों सी महकती हैं
घटायें भी जहाँ तुझको बरस कर छेड़ जाती हैं
जहाँ नदियां तेरे यौवन से मुड़ना सीख जाती हैं
के कुदरत भी तेरी सूरत की सीरत की दीवानी है
बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है ॥

जहाँ हर शाम बाहों में तेरी सब भूल जाता हूँ
जहाँ आँखों में तेरी मैं खुदाई भूल जाता हूँ
जहाँ पर चाँद तेरे सामने फीका सा लगता है
जहाँ बातों में तेरी मैं नज़ारे भूल जाता हूँ
तू मेरे प्यार की पहली और आखिरी निशानी है
बड़ी ही खूबसूरत सी तेरी-मेरी कहानी है ॥

॥आखिर॥ 

Monday, September 15, 2014

कहीं दूर एक चाँद मेरे इंतज़ार में बैठा है
सबकुछ भुला कर वो तनहा मेरे प्यार में बैठा है
ए-हवाओं! ज़रा जाकर उन्हें इस दिल का हाल बताना कि
पलकें बिछाये इस ओर भी कोई उनके इंतज़ार में बैठा है ॥

॥आखिर॥ 

Saturday, September 13, 2014

वो शाम यूँही गुजर गयी तेरे जाने के बाद
जैसे सूख जाते हैं बादल ,बूँदें बरसाने के बाद
गर्मी आयी , सर्दी आयी ,पतझड़ आकर चले गए
न देखा इस दिल ने कोई सावन तेरे जाने के बाद ॥ 

Wednesday, September 10, 2014

ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है

यूँही गुमसुम सी वो चुपचाप चलती रहती है
अपने दमन में हर एक पल संजोति रहती है
कभी देकर ख़ुशी हमको कभी गम देकर के
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥

मेरी मेहनत का सिला मुझको देती रहती है
कामचोरी पे सजा भी दिलाती रहती है
जब चमकता नहीं किस्मत का सितारा अपना
पास आती है , बैठती है , बातें करती है
कहती है हार न मनो पथिक तुम आगे बढ़ो
कई शंघर्षो से भरा तुम्हारा जीवन है
ख़ुशी देकर , सजा , व हौसले को देते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥

उगते सूरज की हर किरण में समायी वो है
दोपहर की भरी गर्मी में समायी वो है
शाम की लालिमा माथे की बिंदी है उसकी
रात की चांदनी में से भीगी , नहायी वो है
इस तरह चाँद को सूरज से यूँ मिलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥

वो है गर्मी में चलती लू के थपेड़ो जैसी
वो है बरसात के मौसम की पहली बूंदों सी
उसमे है शरद की शीतलहरी सी शीतलता
वो है फाल्गुन में बहती शरारती हवा जैसी
यूँही मौसम के हर एक रंग में बदलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥

॥आखिर॥ 

Friday, September 5, 2014

ज़िन्दगी जीने की रफ़्तार बदल देता है
आंसुओं को ख़ुशी में यार बदल देता है
जो बदलते नहीं दुनिया की रस्मो की खातिर
उन शरीफों को यहाँ प्यार बदल देता है ॥

॥आखिर॥

Tuesday, September 2, 2014

तेरे ही हम दीवाने हैं!!

गया है दूर जब से तू मेरी आँखों में पानी है
मगर फिर भी ख्यालों में तेरे ही हम दीवाने हैं ॥

तुझे ही ढूंढते हैं हम जहाँ के आशियानों में
कभी सुबह को देवालय तो शामों को मैखाने में
मगर मिलता नहीं जब तू उदासी दिल पे छाती है
छलकते हैं मेरे आंसू हर एक ही शामियाने में
तुझे जब भूलना चाहूँ तो बस ये याद आता है
के दें कैसे भुला उसको के जिसके हम दीवाने हैं ॥

चढ़ा है रंग जो तेरा उतरता क्यों नहीं आखिर
भले धो लूँ मैं खुद को जाके गंगा के मुहाने में
किये थे अनगिनत वादे रहेंगें साथ जीवन भर
मगर अब ढूंढता तुझको हूँ मैं इन चाँद तारों में
मुझे मालूम मिलना अब दोबारा है नहीं मुमकिन
मगर फिर भी तेरी ख्वाहिश में डूबे हम दीवाने हैं ॥

तेरे संग-संग चले जिन राहों पर सब याद है मुझको
मगर डरता हूँ उन गलियों को फिर से आज़माने में
मेरा मकसद नहीं खुद को परेशान मैं करूँ लेकिन
बहुत मज़बूर हूँ इस आशिकी को आज़माने में
चढ़ी तेरी खुमारी है उतरती ये नहीं "आखिर"
तुझे ही प्यार करते हैं तेरे ही हम दीवाने हैं ॥

॥आखिर॥