Sunday, August 31, 2014

ये तेरी याद है

कभी हंसाती है हमें तो कभी रुला भी जाती है
ये तेरी याद है , वक़्त बेवक़्त आ ही जाती है ॥

कभी लड़ती है मुझसे बहुत छोटी सी बात पे
कभी होती है गुस्सा मेरे हालत पे
मेरे दिन बनाती है कभी
तो कभी बिगाड़ भी जाती है
ये तेरी याद है , वक़्त बेवक़्त आ ही जाती है ॥

ये देखती नहीं है सुबह और शाम को
मेरी थकावट और मेरे आराम को
चुपचाप धीरे से मेरी दुनियां में आकर
ये अपना काम कर ही जाती है
ये तेरी याद है , वक़्त बेवक़्त आ ही जाती है ॥

ना जाने कितनी बार टोका है मैंने खुद को
ना जाने कितनी बार रोका है मैंने इसको
की ना आया कर यूँ मेरे ख्वाबों-खयालो में
पर हर बार ये मुझे दरकिनार कर ही जाती है
ये तेरी याद है , वक़्त बेवक़्त आ ही जाती है ॥

॥आखिर॥

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