Tuesday, July 30, 2013

सलामत रहे

ज़िन्दगी इतनी कम है तो क्यूँ इसमें गम के ठिकाने रहें 
प्यार से इसको भर लो यहाँ बस ख़ुशी के बहाने रहें ॥

जिसने पला है हमको यहाँ जिसने चला सिखाया हमें 
बेटे की बस दुआ है यही उसका वालिद सलामत रहे ॥

ऐसी तालीम दे ऐ खुदा तेरा इंसान सलामत रहे
तेरा मस्जिद सलामत रहे तेरा मंदिर सलामत रहे ॥ 

आज कुछ ऐसा कर ऐ खुदा लोग आपस में फिर न लड़ें 
हर कोई प्यार बांटें यहाँ मुल्क मेरा सलामत रहे ॥ 

हर कहीं है गरीबी यहाँ हर घडी लोग भूखे रहे 
मुल्क ऐ काश अब मेरा हो इसमें भूखा न कोई मरे ॥ 

जब तलक था अकेला मेरा महफ़िलों में बसेरा रहा 
तेरे आने से ऐसा लगा मुझको इक आशियाँ मिल गया ॥ 

प्यार तुमसे किया है तो फिर और किससे जताएंगे हम
ज़िन्दगी के हर इक मोड़ पर अपना तो आशियाना नहीं ||

प्यार का ये नशा है कहाँ मैकदों के किनारे रहे
आँखों से मैं पियून उम्र-भर मेरा साकी सलामत रहे ॥ 

प्यार की ये कहानी मेरी है वफ़ा से भरी हर कहीं 
इसमें तुम भी दुआएं भरो मेरी जोड़ी सलामत रहे ॥

जिंदा हूँ जब तेरा साथ है मर गया जब जुदा हम हुए
ज़िन्दगी के हर एक मोड़ पर अपनी हस्ती सलामत रहे ॥

कोई मज़हब न ज़ात कोई ना ही द्वेष बढ़ाये कभी 
'आखिर' जो भी लिखे लफज़ इश्क की बस इबादत करे ॥