Thursday, March 28, 2013


शगुफ्ता थे , अपनी हंसी दरकिनार कर बैठे 
किसी की याद में नींदें निसार कर बैठे 
और वो आँखें , जिन्होंने कल हमारी नींद लूटी थी 
हुए मजबूर इतने कि , उन्ही से प्यार कर बैठे ।।

Thursday, March 21, 2013

गर हिन्दू होता तो पंडित न बनता 
गर होता जो मुसलमान तो काजी न बनता 
जो छीनी न होती तूने मुझसे मेरी ज़मीन 
ए सियासी भेडियों ,
खुदा कसम मैं आतंकवादी न बनता ।।