Saturday, January 26, 2013

सबसे बढ़िया ये तिरंगा है


कहीं पर्वत है कहीं गंगा है 
कहीं खुशबु कहीं पतंगा है 
देखे है हमने कई रंग
सबसे बढ़िया ये तिरंगा है ।।

हर ख्वाब बने त्यौहार यहाँ 
त्यौहार में सब संग होते हैं 
होली हो या रमजान कभी 
कभी ईद दिवाली होते है 
जब इन त्योहारों के रंग मिले
तो बनता एक ही झंडा है  
देखे है हमने कई रंग
सबसे बढ़िया ये तिरंगा है ।।

मना है जाती विभाजन पर 
हर दिन हम साथ में रहते है 
हम हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई 
सब को भाई कहते हैं 
जब इन वर्णों का रंग मिले 
तो बनता एक ही झंडा है  
देखे है हमने कई रंग
सबसे बढ़िया ये तिरंगा है ।।

है शिखर हमारे उत्तर में 
है दक्षिण में आपर जलज 
है पश्चिम में कुछ रेत मगर 
पूरब में पानी की गंगा है 
जब मौसम के सब रंग मिले  
तो बनता एक ही झंडा है  
देखे है हमने कई रंग
सबसे बढ़िया ये तिरंगा है ।।

जब इतने रंग आँचल में लिए 
लहराता देश का झंडा है 
तो क्यूँ न कहूँ सर ऊँचा कर 
ये मेरे देश का झंडा है 
देखे है हमने कई रंग
सबसे बढ़िया ये तिरंगा है ।।


--->शशांक कुमार पाण्डेय  <--- p="">

Saturday, January 19, 2013

कैसी है तू ऐ ज़िन्दगी


मैं रोता हूँ , तू हंसाती है 
मैं हँसता हूँ , तू रुलाती है 
मैं सुनता हूँ , तू सुनती है
मैं रुकता हूँ , तू चलती है 
न जाने कैसी है  तू ऐ ज़िन्दगी 
अपने ही धुन में चलती जाती है ।।

कभी तो सुन क्या हसरतें है मेरी
कभी तो कर जो फितरतें हैं मेरी  
कभी तो कह जो सुनना चाहूँ मैं 
कुछ तो कर ऐसा कि खुश हो जाऊं मैं 
पर तू हर पल मुझसे अपनी ही बात मानवाती है 
न जाने कैसी है  तू ऐ ज़िन्दगी 
अपने ही धुन में चलती जाती है ।।

जो जीना चाहे उसे मौत दे जाती है 
किसी से मरते हुए दिन बितवाती  है 
कहीं खुशियों की चाँदनी बिखेरी है तूने तो  
कहीं घनघोर अन्धकार छोड़ जाती है 
न जाने कैसी है  तू ऐ ज़िन्दगी 
अपने ही धुन में चलती जाती है ।।

मैं तो कवी हूँ ज़माने की बातें करता हूँ 
कभी नज़ारे तो कभी फ़साने की बातें करता हूँ 
अपनी अभिव्यक्ति से दिल-मिलाने की बात करता हूँ 
पर तू मेरी भी कलाम से अपना गुणगान करवाती है 
न जाने कैसी है  तू ऐ ज़िन्दगी 
अपने ही धुन में चलती जाती है ।।

--->शशांक कुमार पाण्डेय <--- p="p">