Tuesday, October 30, 2012

भूले भटके हर राह में मुलाकात होगी 
ज़िन्दगी की हर धुप हर छाँव में तेरी बात होगी 
लगेगी उस समय ये ज़िन्दगी जन्नत मुझे 
जब तेरे साये में मेरे दिन और 
तेरी बाँहों में मेरी रात होगी ||

Monday, October 29, 2012


वो भी क्या दिन थे जब हम भी प्यार किया करते थे
अपनी चाहत का हर पल उनसे इज़हार किया करते थे
तुम न करो हमसे प्यार मोहब्बत की बातें इस कदर 
की जितनी तुम्हारे दिल में मोहब्बत की आग है 
उतनी हम आँखों से बुझाया करते थे ||

Friday, October 19, 2012

क्या है?

वीराना है दिल मेरा उनकी याद में लेकिन
और वो पूछते है हमसे मसला क्या है? 

वो तो परवानों ने है लाज बचा राखी अब तक 
वगरना शहर में इस हुस्न का जलवा क्या है? 

हर बात हमी से पूछते हैं अनजान बन कर 
तुम्ही कहो ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू  क्या है ?

अगर हर बात तुमको कह के जो समझानी पड़े 
तुम ही कहो फिर दस्तूर-ए-आशिकी का मतलब क्या है ?

मोहब्बत सब से है होने जो लगी दुनिया में 
ऐसी आशिकी का तुम कहो मतलब क्या है ?

तुम जो कहते हो हैं बेईमान सभी इस दुनिया में 
तुम ही बतला दो अब मुझको की ये ईमान क्या है ?

तुमने जो ये करते हो बातें हमेशा मज़हब की 
मुझको बतला दो की इस इश्क का मज़हब क्या है ?

जीतेजी तुम मिले नहीं किसी जगह पे भी 
रोते हो आज मेरी मौत पे वजह क्या है ?

मुझे तो इश्क ने दीवाना किये रखा है 
वगरना शहर में शाहीब मेरी इज्ज़त क्या है ?

वीराना है दिल मेरा उनकी याद में लेकिन 
वो है की खुद को छुपाये बैठे है 
और अक्ल तो तब आई जब चिट्ठी मिली हमे 
की वो भी हर पल मेरे ख्याल में बैठे है ||

Wednesday, October 10, 2012

ek shayar ka dard....:)....:(

मैंने एक शेर कहा तो आलम कुछ यूँ हुए 
कुछ आँखें नाम हुईं कुछ हँसते ही रह गए 
मैं तो शेर सुना के अकेला खड़ा रहा 
सभी अपने-अपने चाहने वालों में खो गए||...♥

Monday, October 1, 2012

Love.....

ज़िन्दगी फिर उन्ही रास्तों पर ले आई मुझे 
जहाँ से मैंने चलना सीखा था 
तेरे चेहरे से हँसना और 
तेरी बाहों में रोना सीखा था ||

पर आज तेरे बगैर वो सब अधूरा लगता है 
दिल ये बेचैन मुझे पागल पूरा लगता है 
यूँ तो मैं सोता नहीं रातों ये जान कर 
की गर नींद आई तो तुझसे मिलना अधूरा लगता है ||

कुछ यूँ मुसल-सल मुझे तेरी याद आती है 
मजबूर मेरे दिल को विचलित कर जाती है 
हर वक़्त बस तेरा तसव्वुर इन आँखों को रहता है 
और पूछने पर हर बार दिल बस यही कहता है :
कि
     लोग मिलते हैं , मिल के इकरार होता है 
     आँखों ही आँखों में चुपके से इज़हार होता है 
     कि जब तक आँख से मोती गिरे न तेरी यादों में 
     मेरी मनो तो तब जाके किसी से प्यार होता है ||