Tuesday, December 18, 2012

दोस्तों की महफ़िलों में हमने भी जम के जाम छलकाए 
जहाँ तक नज़र गयी सभी झूमते नज़र आये 
मैं भी झूमा तो , मगर तेरे ख्वाब में जहाँ 
पैमाने ना हो कोई और तू आँखों से जाम पिलाये ।। 

Monday, December 17, 2012

कभी तो ज़िन्दगी में एक मुकाम पाउँगा 
जब रातों को चैन और दिन में सुकून पाउँगा
बस ये सोच के दिन रात लगा रहता हूँ कि 
अपनी हसरतों का मैं भी अंजाम पाउँगा।।

Sunday, December 9, 2012

life as visible to me...:)


ज़िन्दगी में हर कदम पर रोशंनी नहीं होती
तन्हाइयां  भी है यहाँ , सिर्फ महफिलें नहीं होती
लोग तो मिलते है, सबसे बंदगी नहीं होती
अरे ज़िन्दगी तो हर कदम पर, जूझने का नाम है
जो कटे आराम से वो ज़िन्दगी नहीं होती ।।

Thursday, December 6, 2012

दोस्तों की महफ़िलों में मिल के हमने  भी जाम छलकाए 
जहाँ तक नज़र गयी , सभी झूमते नज़र आये 
पर ये नशा भी फीका लगा हमे उस नशे के आगे जब 
जान दूँ में हंस के मेरी माँ और तेरा परचम पूरे विश्व में लहराए ।।

Wednesday, November 21, 2012

ऐ देश तेरी नादानी पे मुझे हंसी आती है 
क्या ऐसे भी किसी देश द्रोही को फंसी दी जाती है 
की जितना उसे पालने में खर्च किये तूने 
उसमे न जाने कितने गरीबों की भूख मिट जाती है 
ऐ देश तेरी नादानी पे मुझे हंसी आती है ।।

Tuesday, October 30, 2012

भूले भटके हर राह में मुलाकात होगी 
ज़िन्दगी की हर धुप हर छाँव में तेरी बात होगी 
लगेगी उस समय ये ज़िन्दगी जन्नत मुझे 
जब तेरे साये में मेरे दिन और 
तेरी बाँहों में मेरी रात होगी ||

Monday, October 29, 2012


वो भी क्या दिन थे जब हम भी प्यार किया करते थे
अपनी चाहत का हर पल उनसे इज़हार किया करते थे
तुम न करो हमसे प्यार मोहब्बत की बातें इस कदर 
की जितनी तुम्हारे दिल में मोहब्बत की आग है 
उतनी हम आँखों से बुझाया करते थे ||

Friday, October 19, 2012

क्या है?

वीराना है दिल मेरा उनकी याद में लेकिन
और वो पूछते है हमसे मसला क्या है? 

वो तो परवानों ने है लाज बचा राखी अब तक 
वगरना शहर में इस हुस्न का जलवा क्या है? 

हर बात हमी से पूछते हैं अनजान बन कर 
तुम्ही कहो ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू  क्या है ?

अगर हर बात तुमको कह के जो समझानी पड़े 
तुम ही कहो फिर दस्तूर-ए-आशिकी का मतलब क्या है ?

मोहब्बत सब से है होने जो लगी दुनिया में 
ऐसी आशिकी का तुम कहो मतलब क्या है ?

तुम जो कहते हो हैं बेईमान सभी इस दुनिया में 
तुम ही बतला दो अब मुझको की ये ईमान क्या है ?

तुमने जो ये करते हो बातें हमेशा मज़हब की 
मुझको बतला दो की इस इश्क का मज़हब क्या है ?

जीतेजी तुम मिले नहीं किसी जगह पे भी 
रोते हो आज मेरी मौत पे वजह क्या है ?

मुझे तो इश्क ने दीवाना किये रखा है 
वगरना शहर में शाहीब मेरी इज्ज़त क्या है ?

वीराना है दिल मेरा उनकी याद में लेकिन 
वो है की खुद को छुपाये बैठे है 
और अक्ल तो तब आई जब चिट्ठी मिली हमे 
की वो भी हर पल मेरे ख्याल में बैठे है ||

Wednesday, October 10, 2012

ek shayar ka dard....:)....:(

मैंने एक शेर कहा तो आलम कुछ यूँ हुए 
कुछ आँखें नाम हुईं कुछ हँसते ही रह गए 
मैं तो शेर सुना के अकेला खड़ा रहा 
सभी अपने-अपने चाहने वालों में खो गए||...♥

Monday, October 1, 2012

Love.....

ज़िन्दगी फिर उन्ही रास्तों पर ले आई मुझे 
जहाँ से मैंने चलना सीखा था 
तेरे चेहरे से हँसना और 
तेरी बाहों में रोना सीखा था ||

पर आज तेरे बगैर वो सब अधूरा लगता है 
दिल ये बेचैन मुझे पागल पूरा लगता है 
यूँ तो मैं सोता नहीं रातों ये जान कर 
की गर नींद आई तो तुझसे मिलना अधूरा लगता है ||

कुछ यूँ मुसल-सल मुझे तेरी याद आती है 
मजबूर मेरे दिल को विचलित कर जाती है 
हर वक़्त बस तेरा तसव्वुर इन आँखों को रहता है 
और पूछने पर हर बार दिल बस यही कहता है :
कि
     लोग मिलते हैं , मिल के इकरार होता है 
     आँखों ही आँखों में चुपके से इज़हार होता है 
     कि जब तक आँख से मोती गिरे न तेरी यादों में 
     मेरी मनो तो तब जाके किसी से प्यार होता है ||

Monday, September 17, 2012

ज़िन्दगी की हर डगर पर अपना काम चला लेते है 
जब यार हो साथ तो हम भी माहौल बना लेते है
अरे हम तो उनमे से है कभी हार नहीं मानते और  
मौसम हो कैसा भी हम आशियाने बना लेते है ||

Friday, September 14, 2012

ये उन रातों का कसूर है ज़ालिम 
जो हमने तेरे साथ काटी थी
कि अब तन्हाई के नाम से भी डरते थे  
तेरे साथ हर महफ़िल में महसूस किया था
मोहब्बत के सुरूर को हमने 
पर आज तनहा हुए तो जाना 
कि तुझे कितना प्यार करते थे ||

Thursday, September 6, 2012

आंसुओं को छुप-छुप के निकलते 
कई बार हमने देखा 
जो रहते थे स्वछन्द हमेशा उनको भी 
बेक़रार हमने देखा 
और अब तक तो सिर्फ सुनते आये थे 
हम किस्सा मोहब्बत का 
पर तुझसे नज़रें मिली पहली बार तो 
क्या होता है प्यार हमने देखा ||

Wednesday, August 22, 2012

इस इश्क का हर एक राज़ गहरा है  
इस दिल पर कब किसका पहरा है 
अरे हमे तो यूँही बदनाम कर रखा है 
लोगो ने भंवरा कह कर 
पर हमारे दिल में बसा सिर्फ 
हमारे यार का चेहरा होता है ||

Saturday, July 14, 2012

दर्द-ए-दिल

बस तेरी ही आरज़ू थी मेरे इस दिल में बसी 
बस तेरी थी जुस्तजू मेरी निगाहों में कहीं 
बस तेरा ही था तस्सव्वुर मेरे हर इक ख्वाब में 
बस तेरी ही खुशबुएँ थी मेरी साँसों में बसी ||

बस तेरी ही बातें थी और बस तेरा ही नूर था 
प्यार तुझसे करने को मैं हर घडी मजबूर था 
प्यार की थी रुत अनोखी जिसमे मैं मगरूर था 
नाज़ था तेरी वफ़ा पर जो मेरा गुरूर था
साथ रहते हम हमेशा एक ही तो ख्वाब था
साथ तेरा पाके मैं हर पल नशे में चूर था  ||

ख्वाब था शायद वो मेरा आज ये जाना हूँ मैं 
जनता न था तुझे पर आज पहचाना हूँ मैं 
प्यार के क्या मायने हैं तुने न जाना कभी 
मेरे दिल की धडकनों को तुने पहचाना नहीं 
जीते थे ये बस तुम्ही पर और मरते तुमपे ही 
थी वफाई बस दिलों में चाहते थे तुमको ही   ||

क्या वफ़ा और क्या वफाई तू कभी कर पाएगी 
बेवफा है बेवफाई करके ही  मर जाएगी   
प्यार में है क्या मज़ा और क्या छुपी सच्चाई है
तुने न जाना कभी अब जान न तू पायेगी 
प्यार कितना करता था तेरे अक्स से तेरे नूर से
मेरे जैसी आशिकी तू फिर कभी न पायेगी ||

ऐसा कुछ कर दे खुदा की तेरा यूँ नसीब हो 
हुस्न हो जब ये मुक्कल प्यार न करीब हो 
जब कभी तुझपे चढ़ा इस प्यार का सुरूर हो 
रातें हो तेरी जवान पर हुस्न ये बेनूर हो
की जो तुने बेवफाई क्या सजा तुझको मिले 
बस यही चाहूँगा ऐसा यार न फिर से मिले ||

कल और अब

ये मौसम ये रुत और ये तनहा सा आलम 
तेरी याद बस मुझको आने लगी है 
जो बातें कभी करती थी हमको घायल 
वो बातें ही अब तो सताने लगीं है
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||

निगाहों में थे जो भी चाहत के नगमे 
वो नासूर बन कर डराने लगीं  हैं  
थी आँखों की नदियाँ जो बरसों से सूखी 
वो बिन मौसम बरसात लाने लगीं हैं  
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||

जो रहते थे बस तेरी आँखों में डूबे 
तेरी एक झलक को बेगाने हुए हैं 
शराबों से जो हर पल करते थे तौबा 
शराबों में अब वो नहाने लगे हैं
नजारों को अब तक तो ढूँढा था तुझमे 
अब तुझको नजारों में पाने लगे है
ये मौसम ये रुत और ये तनहा सा आलम 
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||

Friday, June 15, 2012


कुछ इशारों में तुमने कहा 
कुछ इशारों में हमने सुना 
बातें तो दिल की थी मगर 
होठों ने कुछ न कहा 
बस आँखों ने तेरी कहा कि
ये शाम यूँ ही मस्तानी रहे
ये रात यूँ ही दीवानी रहे
रहे हस्ती हमारी या ना रहे यहाँ
पर अमर तेरी मेरी प्रेम कहानी रहे ||

Friday, June 1, 2012

क्या गम और क्या शिकायत 
आँखों में तेरी भूल जाता हूँ 
मिटती हर थकावट 
बातें सुन तेरी मुस्कुराता हूँ
तू मेरी जान है 
कैसा करम मेरे खुदा का है 
जो तुम न साथ हो तो 
साँस लेना भूल जाता हूँ ||

Wednesday, May 30, 2012


बड़ी मुश्किल में पड़ता दिल इसे जब प्यार होता है 
निगाहों को तस्सव्वुर बस तेरा हर बार होता है 
मज़ा तब आंसुओं का है बशर्ते जान पाए तू 
ये आंसू बस तुम्हारे साथ का अरमान होता है 
नजाकत प्यार की कितनी भी अच्छी हो भले ज़ालिम 
जो न हो साथ तू तो बस वही नासूर होता है 
और हर इक फूल पर मंडराने वाले भंवरे क्या जाने 
बड़ी मुद्दत से दुनिया में किसी से प्यार होता है ||

Friday, May 25, 2012

गुल और गुलज़ार सब गुमनाम हो गए 
एक नाम तेरा रह गया हम बेनाम हो गए 
कैसी खुमारी इश्क की तेरे सनम मुझपर 
की नाम करने थे चले बदनाम हो गए ||

Sunday, May 13, 2012

माँ

प्यार तेरा बस प्यार मिला 
हर एक दिन हर एक बार मिला 
आँचल की पनाहों में तेरी 
मेरा हर सपना साकार मिला 
दुनिया ने डराया जब मुझको
अपनों ने सताया जब मुझको 
तेरी ममता तेरा प्यार मिला 
मेरा हर सपना साकार मिला ||

है याद मुझे भी हर वो पल 
तेरी बाहों में जब सोया था 
जब भी भीगी मेरी आँखें 
तेरा आँचल पा कर रोया था 
पापा से डरता था हर पल 
पर तुझसे उतना ही प्यार मिला 
तेरी बातों में तेरे काँधे पर 
मुझको जीवन साकार मिला ||

बयां न कर सकता वो पल 
तेरी आँखों से जब दूर हुआ 
तेरे हांथों के खाने को जब 
न पाने को मजबूर हुआ 
जितना भी दूर रहा तुझसे 
उतना मुझको एहसास हुआ 
तेरे क़दमों में जन्नत थी मेरी 
और दूर जहन्नुम साथ हुआ ||

ए काश खुदा मेरा ये करे 
ताउम्मर मुझे तेरा प्यार मिले 
लूँ जन्म कभी इस धरती पर 
तेरी आँचल का साथ मिले ||

चुका नहीं सकता उसको 
जो तुने है उपकार किया 
मुझे जन्म दिया मुझे प्यार किया 
मेरे जीवन का उदधार किया 
तेरे दूध का क़र्ज़ बड़ा मंहगा 
न उसको चुका मैं सकता हूँ 
मर सकता हूँ  इस जीवन में 
न तुझसे जुदा हो सकता हूँ ||

।।आखिर।। 


Wednesday, April 25, 2012

कुछ बातें जो दिल को तडपाती हैं
शायद कभी हंसती हैं
या हर पल रुलातीं हैं
जीवन को बेचैन करतीं है
और कभी जीना सिखातीं हैं
कभी देखते थे चेहरे जिनके हम हर रोज़
आज उनसे बात करने को भी तरसाती है
शायद इसी का नाम जीवन है
जो हमे कभी हंसाती है ..और कभी रुलाती है ...:-\

Saturday, April 21, 2012

आंसुओं से कह दो की छुप जाएँ वो पलकों के नीचे
कि हर इक राज़ दिल का ये बयां कर जाएँगी
कि चाहत कि कहानी जो बयां ये लब न कर पाए
कि जो गर खुल गयीं आँखें तो बातें सब बयां कर जाएँगी ||

आंसुओं से कह दो की छुप जाएँ वो पलकों के नीचे
कि हर इक राज़ दिल का ये बयां कर जाएँगी
कि चाहत कि कहानी जो बयां ये लब न कर पाए
कि जो गर खुल गयीं आँखें तो बातें सब बयां कर जाएँगी ||

Wednesday, April 18, 2012

इज़हार-ऐ -मोहब्बत

कुछ वक़्त का तकाजा था , कुछ मौसम-ए-दस्तूर

तू थी दिल के पास मगर , फिर भी मुझसे दूर

पर एहसास एक हसीं मेरा तुझमे गहरा था

भूल नहीं सकता उस पल को मैं जब

तेरी आँखों में सजा शर्म का सुर्ख पहरा था

तू चुप थी मगर आँखें तेरी हर बात कह गयी

जो दिल में थी छुपी तेरे हर राज़ कह गयी

कि कितनी मोहब्बत है तुझे मुझसे जहान में

न चाहते हुए भी तू मुझे ये बात कह गयी ||

बातें हुई इशारों में कोई सुन न भी सका

तेरी आँखों ने जब कहा तो मैं इकरार कर सका

हाँ है मोहब्बत मुझको तेरे नाम से यहाँ

जो तुझसे है जुदा उस हर इक काम से यहाँ

है चाह ये मेरी की बस एक तू मिले मुझे

तेरे साथ सा मुक्कदस सहारा यूँ मिले मुझे

कि कट जाएँ हर इक पल मेरा तेरी पनाह में

और मौत जब मिले तो तेरे साथ ही यहाँ ||


Tuesday, April 3, 2012

दिल चाहता है

आज फिर तुमसे मिलने को दिल चाहता है

निगाहों में खिलने को दिल चाहता है

गुस्ताखियाँ तो बहुत की थी मैंने

मनमानी करने को दिल चाहता है ||

मोहब्बत की कुछ ये कहानी अजब है

अदाओं में पायी नयी ज़िन्दगी है

इशारों-इशारों में बातें क्या कर दी

निगाहें मिलाने को दिल चाहता है ||

तसव्वुर है तेरा तेरी बात है यूँ

की भूला जहाँ मैं नहीं याद खुद को

तेरी बातों ने ऐसा जादो किया है

की फिर झिलमिलाने को दिल चाहता है ||

तनहाइयाँ थी बहुत ज़िन्दगी में

थे गम मुझपे भरी, ख़ुशी मुझसे रूठी

तेरी चाहतों का असर कुछ हुआ यूँ

की फिर मुश्कुराने को दिल चाहता है ||

Saturday, March 24, 2012

आशिकी

कोई गुमनाम है यहाँ कोई बदनाम है यहाँ
हर एक को हर पल कहीं कुछ काम है यहाँ
गर मिल सके फुर्सत तुम्हे तो ये भी सोचना
तेरे इकरार को हल पल कोई परेशान है यहाँ ||
कहते हो मैं ख़राब हूँ बस इतना सोच के
इक रात मेरे हाथ में तुम जाम देख के
कहना बड़ा मुश्किल है मगर यार सुन जरा
वो याद थी आंसू बनी तेरी राह देखते ||
आ देख मेरी आँखों में सपना तेरा ही है
आ देख मेरी बातों में अपना सा तू ही है
है आज भी ख़्वाबों में मेरे तेरा सुरूर वो
की जलता है अब भी ये चाँद तुझको देख कर||
गर मिल न मैं तुम्हे इस जन्म में यहाँ
बस इतना ही कहना मेरी मैय्यत को देख के
तू मर गया मर के मुझे बदनाम कर गया
सब सोचते ही रह गए टू वो काम कर गया
कुछ लोगों की पहचान यहाँ आशिकी से है
तू मर के आशिकी का ऊँचा नाम कर गया ||

Sunday, March 4, 2012

इश्क

माना तेरी नज़रों में गुनाहगार हूँ मैं

शायद तेरे ख्यालों में आज भी सवार हूँ मैं

चाहा बहुत की खत्म कर दूँ ये सिलसिला मोहब्बत का तुझसे

पर कम्बखत आज भी तेरी चाहत में गिरफ्तार हूँ मैं||

गिरफ्तार हूँ तेरी बातों में या तेरी आँखों में न जानूं मैं

इक तेरे सिवा किसी भी चेहरे को न पहचानूँ मैं

कितनी मोहब्बत है तुझसे कैसे करूँ बयां

की तेरे साथ इक पल जीने को ख़ुशी से मर जाऊं मैं ||

तू इस कदर मेरे ख्यालों में हर रोज़ आती है

न जाने इस दिल को कितना तडपाती है

की बयां नहीं कर सकता उस दर्द की दास्तान को

जब नासूर बन के तेरी याद इस दिल को आती है ||

कहता हूँ नासूर जिसे शायद मेरा ख्याल है

मेरे होठों पर आज भी वही सवाल है

की क्या खता हुई हमसे जो ये सजा मिली

कि तेरे तस्सव्वुर में खो कर आज भी ये दिल बेहाल है ||

Thursday, January 26, 2012

हिन्दुस्तान

कुछ कहानी है है अजब , कितनी गजब है दास्ताँ

मुश्किलें सब छंट गयीं , न मिट सका इसका निशान

बाजु-ऐ-कातिल की भी होगी अधूरी दास्तान

गर नाम न होगा शहीदों का kahani में बयां

जो हो गए कुर्बान हंस कर इक सवेरा लाने को

की जी सकें निश्चिन्त हम , आज़ाद हो हिन्दुस्तान ||

राह थी मुश्किल बड़ी , कांटे बीचे हर डग यहाँ

नंगे पाव थे चले ऐसे थे वीर नौजवान

राह थी जिसने दिखाई देश को आज़ादी थी

खुद लतियों का ले सहारा चलता था बापू महँ ||

हर वर्ग था शामिल जब जश्न-ऐ-आज़ादी मानाने को

तब देश के दुश्मन बना बैठे नया हिन्दोस्तान

है मुल्क वो अपना मगर जाने वो क्या है सोचता

की दुश्मन-ऐ-हिन्दोस्तान बन बैठा है वो अब यहाँ

न जीता है वो खुद वहां न जीते है हम अब यहाँ

न जाने कब किस मोड़ पे वो छोड़ दे अपना निशान ||

यूँ तो मिल्ली आज़ादी पर क्या सच में हम आज़ाद है

आदमी तो आदमी , है सोच का शोषण यहाँ

भ्रस्त है सब लोग जाने कैसा ये गणतंत्र है

की आदमी को आदमी है काटता हर पल यहाँ ||

अब भी समय है रहनुमाओं जाग जाओ तुम यहाँ

तो भी मुक्कमल हो सकेगा गणतंत्र का सपना यहाँ

वरना उठेंगी आंधियां हुंकार होगा फिर जवान

और फिर बनेगा देश में कोई भगत ,तो कोई बापू महान

फिर लाज तुम अपनी बचा पाओगे न उस पल यहाँ

जब देश का होकर न पाओगे दो गज मिटटी यहाँ ||

बात है इतनी की अब जागो उठो कुछ तो करो

की बन सके गणतंत्र प्यारा न्यारा अपना ये जहाँ

घूम लो दुनिया भले जितनी भी लेकिन ये सुनो

सरे जग में है नहीं कोई दोसरा हिन्दोस्तान ||

Happy Republic Day...