Sunday, September 25, 2011

हाल-ऐ-दिल

मुश्किल बड़ी की दिल को है अरमान बस तेरा
दिखता नहीं तेरे सिवा कोई और दूसरा
एहसास ये कुछ यूँ मुझे पहली दफा हुआ
हर पल तुम्हे चाह या तुम्हे देखता रहा ||

क्या क्या छुपाये रखा है दिल मैं न जानता
क्यूँ धुंधली सी दिखती है ये मंजिल न जानता
है अक्स तेरे प्यार का मेरा गुरूर जो
कब तक चलूँ इस राह पर दिखता न रास्ता ||

उम्मीद तेरे दिल में इक छोटा सा घर मिले
मैं जी सकूँ जिस वक़्त वो अदना सा पल मिले
कैसे बताऊँ जीने की जो तड़प है तेरे संग
कुछ यूँ समझ क मौत मुझे तेरे दर मिले ||

मर के भी मैं जियूँगा तेरी यादों में कहीं
भूले से भी न भूल पाएगी मुझे कभी
नम होंगी तेरी आँखें भी जब उठेगी बात यूँ
क्या कुछ मैं कर गया थे तेरे प्यार में यूँही ||

Tuesday, September 20, 2011

क्यूँ

क्यूँ भीड़ में भी हर पल एक अजीब सी तन्हाई है

दिलो दिमाग पर मेरे एक उदासी छाई है

क्यूँ सुनने लगा हु आज कल मैं अपनी ही धडकनों का शोर

क्या यूँही चलती प्यार की पहली पुरवाई है |||

क्यूँ तेरे तस्सवुर में डूबी रहती है तनहा मेरी हर रातें

क्यूँ में अकेले में करता हूँ खुद से इतनी सारी बातें

क्या हो रहा है मुझको मुमकिन नहीं है बताना की

क्यूँ रह रह के याद आती है तेरी मेरी वो हसीं मुलाकातें ||

क्यूँ हर रंग रूप में मुझे बस तेरा ही अक्स दिखता है

क्यूँ इन वादियों इन फिजाओं में छाया तेरा ही नूर लगता है

बेशक जो हाल है मेरे दिल का वो मेरा कसूर है लेकिन

क्यूँ कल तक ये दिल जो मेरा था आज वो तेरा लगता है||

क्यूँ तुमसे इतना प्यार हुआ की खुद से बेवफा बन गए

क्यूँ हर चीज़ थी मेरे पास पर तुम दर्दे जिगर दे गए

क्यूँ बेखुदी तेरे प्यार की छाई है मुझे पे इस तरह

की तेरी चाहत में हम खुद को फ़ना कर गए ||