Sunday, July 31, 2011

कुछ बात है दिल में जो होठों तक नहीं आती

खामोश दिल की धड़कन हल पल तुझे है बुलाती

तू न हो साथ तो हर पल इक बेचैनी है मुझे सताती

अब आ भी जा पास तू मेरे ये दूरी मेरी जान है ले जाती |||

Tuesday, July 26, 2011

भारत

देश मेरा ये देश हसीं दुनियां में सबसे चंगा है

यहाँ सर पे मुकुट,पाँव में जलज और दिल में बहती गंगा है

जीवन की डगर मुश्किल है यहाँ जन-जीवन भूखा नंगा है

फिर भी लोगों के दिलों में यहाँ बहे खून की जगह तिरंगा है ||

बापू का कफ़न , चाचा का तिलक ,आज़ाद ने खून दे सींचा है

चाहत की कलि खिलती है यहाँ खुशियों से भरा ये बगीचा है ||

है स्वर्ग यही जन्नत है यहाँ ,हर जीव यहाँ पर जीता है

हर नर में यहाँ पर राम बसे , नारी में बसीं यहाँ सीता है ||

चरित्र दिखा रामायण से , जीवन को बताती गीता है

भक्ति को सिखा हनुमत ने यहाँ भगवान् को सबसे जीता है ||

सूरज भी जिसे करता है नमन , और जलधि चरण को धोता है

देवों की धरा इस धरती को , ये जग पाने को रोता है||

अब देश मुझे वो लगता नहीं शायद जो पहले दिखता था

थी राम राज्य की सोंच मगर , हर पल यहाँ रावन दिखता है ||

साधारण जन की बात क्या हो , हर ख्वाब यहाँ पर बिकता है

था प्यार कभी संसार यहाँ , अब प्यार यहाँ पर बिकता है ||

ये वक़्त हमारा है अब से , कर्त्तव्य हमारा होता है

करना है मुक्त गरीबी से , बनना हमे विश्वविजेता है ||

आओ अब हम सब प्राण ये लें , हो राष्ट्र सेवा जीवन अपना

कर्त्तव्य परायण हो हम सब , करें देश का हर पूरा सपना ||

Wednesday, July 20, 2011

इश्क में तेरे हम कायल ही रह गए
सारा जहाँ मर गया हम घायल ही रह गए
मुद्दत-ए-आरज़ू दिल में तेरे दीदार की है बस
तमन्ना दिल में रह गयी और हम तनहा रह गए ||

Tuesday, July 19, 2011

कुछ बातें

कुछ बातें थी जो अपनी वो बातें पीछे छूट गईं

खट्टी मीठी आवाजों की बस यादें हममे छूट गईं

तुमसे न बिच्चादने की चाहत हर लम्हा दिल बसी रही

जीवन क कटीं संगर्ष में अब तेरी आहात पीछे छूट गईं ||

वो काली काली सी आखें जो हमसे बातें करती थीं

जब चले प्रेम की पुरवाई ख़ामोशी बातें करती थीं

कुछ न कह कर सब कहती थीं जब हमसे रूठा करतीं थीं

वो प्यार भरी वो मस्तानी जो रातें थीं वो छूट गईं ||

जब यारों का था संग हमे ख़ामोशी हमसे डरती थी

खुशियाँ रहती हर दिल में तब आखें न किसी की रोतीं थीं

चुप कभी नहीं रहता था मैं प्रेषण सभी को करता था

वो चिल्लाने वो गुर्राने की आदत थी वो छूट गई ||