Saturday, April 30, 2011

क्यूँ

क्यूँ दिल चाहता है तुमको ,क्यूँ मैं तुमपे मरता हूँ
क्यूँ तेरे दीदार की हसरत लिए बस जीता हूँ
क्यूँ तेरी चाहत का हर लम्हा मेरी सांसों में समाया है
क्यूँ कोई उम्मीद आज भी मुझे तेरे दर पे ले आया है |

क्यूँ ये लगता है की जीना नामुमकिन है तेरे बिना
क्यूँ मरना भी नसीब नहीं हो पाया है ,
क्यूँ सिसकियाँ भरता है ये दिल ,क्यूँ ये कभी रो नहीं पाया है
क्यूँ हर मौहौल में इसने खुद को गुमसुम ही पाया है |

क्यूँ हर लम्हा इक कशिश महसूस करता है ये दिल
क्यूँ तुझपे इसे इतना प्यार आया है
क्यूँ ये हर चेहरे में ढूंढता है ये तेरा अक्स
क्यूँ ये शाम तेरी आगोश में गुजरने को इतना तडपाया है |

क्यूँ इक डर सा लगता है तुझे खोने का
क्यूँ भीड़ में भी इतनी तन्हाई है ,
क्यूँ मैं प्यार करता है तुमसे इतना
क्यूँ मेरे जीवन की लगती तू परछाईं है |

क्यूँ मेरी तकदीर ज़ालिम है मुझपे इतनी
क्यूँ मैंने आज तक हिम्मत कभी नहीं जुटाई है ,
क्यूँ प्यार करता हूँ मैं तुमसे कितना
ये बात आज तक मैंने तुमसे छुपायी है |

आज दिल ने मेरे मुझे ये हकीकत बताई है
कि तुही सुबह है मेरी ,और तू ही शामे तन्हाई है ,
कि जी नहीं सकता हूँ मैं तेरे बिना यहाँ
क्यूंकि मेरी जान तुझमे समाई है ||