Saturday, January 22, 2011

आशिकी

कभी तो याद करो ऐसे
कि आँखों में नमी न हो
हमसे तुम मिलती रहो यूँ
कि सांसों कि कमी न हो
कभी भी दूर न हो तू
यही दुआ है मेरी
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो ||

हम यूँही मिलते रहे
ख़्वाबों कि तस्वीरों में
लड़ते रहते थे अपनी
अनकही तकदीरों से
पर कभी मिल न सके हम
यही गिला बस है
बाँध रखा था हमें
राहों कि जंजीरों ने
इतनी मुद्दत से थे चाहा तुझे
जब तू ही न हो
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो ||

रोका करते थे मुझे
सारे ज़माने वाले
रोका करते थे मेरे
पैर में पड़ते छाले
पर तेरे इश्क ने मुझको
इतनी ताकत बक्षी
आँख कर बंद किया पार
कितने जलते नाले
अब तेरे इश्क से बढ़कर
कोई इबादत न हो
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो |||