Saturday, October 1, 2011

मैं क्या था और क्या बन गया
बेजान ज़मीं था मैं आफ़ताब बन गया
तेरे इश्क में कुछ ऐसा फ़िदा हुआ हु मैं कि
तुमसे वफाई की और खुद से बेवफा हुआ ||

अनजान डगर थी इस रहें गुलिस्तान की
चलता रहा मैं जिसपे अंधों की तरह यूँ
फिर जाने क्या गजब सा असर मुझपे हुआ यूँ
रहें की जैसे रुक सी गयी मैं भी थम गया ||

कैसा अजब सा दर्द ये मुझको दिया खुदा
पाकर मैं अपने प्यार को क्यूँ मैं न पा सका
हर पल मैं सोचता हु यहाँ क्या खता हुई
क्यूँ जीते जी मैं तेरे इश्क में फ़ना हो गया ||

Sunday, September 25, 2011

हाल-ऐ-दिल

मुश्किल बड़ी की दिल को है अरमान बस तेरा
दिखता नहीं तेरे सिवा कोई और दूसरा
एहसास ये कुछ यूँ मुझे पहली दफा हुआ
हर पल तुम्हे चाह या तुम्हे देखता रहा ||

क्या क्या छुपाये रखा है दिल मैं न जानता
क्यूँ धुंधली सी दिखती है ये मंजिल न जानता
है अक्स तेरे प्यार का मेरा गुरूर जो
कब तक चलूँ इस राह पर दिखता न रास्ता ||

उम्मीद तेरे दिल में इक छोटा सा घर मिले
मैं जी सकूँ जिस वक़्त वो अदना सा पल मिले
कैसे बताऊँ जीने की जो तड़प है तेरे संग
कुछ यूँ समझ क मौत मुझे तेरे दर मिले ||

मर के भी मैं जियूँगा तेरी यादों में कहीं
भूले से भी न भूल पाएगी मुझे कभी
नम होंगी तेरी आँखें भी जब उठेगी बात यूँ
क्या कुछ मैं कर गया थे तेरे प्यार में यूँही ||

Tuesday, September 20, 2011

क्यूँ

क्यूँ भीड़ में भी हर पल एक अजीब सी तन्हाई है

दिलो दिमाग पर मेरे एक उदासी छाई है

क्यूँ सुनने लगा हु आज कल मैं अपनी ही धडकनों का शोर

क्या यूँही चलती प्यार की पहली पुरवाई है |||

क्यूँ तेरे तस्सवुर में डूबी रहती है तनहा मेरी हर रातें

क्यूँ में अकेले में करता हूँ खुद से इतनी सारी बातें

क्या हो रहा है मुझको मुमकिन नहीं है बताना की

क्यूँ रह रह के याद आती है तेरी मेरी वो हसीं मुलाकातें ||

क्यूँ हर रंग रूप में मुझे बस तेरा ही अक्स दिखता है

क्यूँ इन वादियों इन फिजाओं में छाया तेरा ही नूर लगता है

बेशक जो हाल है मेरे दिल का वो मेरा कसूर है लेकिन

क्यूँ कल तक ये दिल जो मेरा था आज वो तेरा लगता है||

क्यूँ तुमसे इतना प्यार हुआ की खुद से बेवफा बन गए

क्यूँ हर चीज़ थी मेरे पास पर तुम दर्दे जिगर दे गए

क्यूँ बेखुदी तेरे प्यार की छाई है मुझे पे इस तरह

की तेरी चाहत में हम खुद को फ़ना कर गए ||

Wednesday, August 31, 2011

मैं

याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं
समुन्दर की लहरों सा चंचल या
ठहरा हुआ पानी हूँ मैं
जीवन की भाग दौड़ में
हर दम लड़ता हुआ इक सेनानी हूँ मैं
कवी की कल्पना सा अद्भुत
या पंछियों सा आज़ाद प्राणी हूँ मैं
याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं |

जीवन रूपी रेगिस्तान में
प्यार की तलाश में
दर दर भटकता एक सैलानी हूँ मैं
हँसना हँसाना काम है मेरा
शायद किसी जोकर की कहानी हूँ मैं
चाहत में जान तक लुटा दे जो
किसी ऐसे आशिक की जवानी हूँ मैं
ख़ुशी क लम्हे और गम के पल
रोक न पायें जिन्हें
आँखों में बहता वो पानी हूँ मैं
याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं ||

Friday, August 26, 2011

पहली मुलाकात

कुछ यूँ उनसे मेरी मुलाकात हुई
बिन मौसम ही बरसात हुई
अलफ़ाज़ मिले न हमे उस पल
आँखों आँखों में बात हुई
बरसात हुई और बात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

बिन सोचे हर इक बात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
फिर हर इक छान और हर लम्हा
बस चाहत की बरसात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

आज़ाद सा पंछी था ये दिल
इक लम्हे में फिर रात हुई
आँखों में बसी तेरी सूरत
जाने कसी ये बात हुई
सपने थे मेरे कुछ और मगर
हर सपने में तुम साथ हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

Friday, August 5, 2011

दोस्त

ज़िन्दगी है यूँ नशीली बिन पिए चढ़ जाती है
दोस्त जैसी ये दुआ बिन कुछ कहे मिल जाती है
होती है ऐसे मुकम्मल फिर हमारी ज़िन्दगी
राह की मुश्किल हमे खुद राह दे कर जाती है
होता है मुश्किल बड़ा जीना बिना इसके ये पल
साथ हो गर ये तो इक पल मौत भी रुक जाती है ||

छु सके हमको तन्हाई ये गंवारा है नहीं
कर सके कोई दुखी इनको गंवारा है नहीं
ये फ़रिश्ते है ज़मीं के है खुदा इनमे बसा
है अगर जो दोस्ती तो है इबादते खुदा ||

कहता है मुझेसे खुदा कि मिल नहीं सकता मैं रोज़
पर बना कर दोस्त मिलता है वो मुझसे हर जगह
प्यार बरसता है मुझपे मैं मिलूं उसे जिस जगह
पाकर इसको खो न देना न कोई इसकी तरह
है अगर ये पास तो बनता है मधुर जीवन मेरा ||

Sunday, July 31, 2011

कुछ बात है दिल में जो होठों तक नहीं आती

खामोश दिल की धड़कन हल पल तुझे है बुलाती

तू न हो साथ तो हर पल इक बेचैनी है मुझे सताती

अब आ भी जा पास तू मेरे ये दूरी मेरी जान है ले जाती |||

Tuesday, July 26, 2011

भारत

देश मेरा ये देश हसीं दुनियां में सबसे चंगा है

यहाँ सर पे मुकुट,पाँव में जलज और दिल में बहती गंगा है

जीवन की डगर मुश्किल है यहाँ जन-जीवन भूखा नंगा है

फिर भी लोगों के दिलों में यहाँ बहे खून की जगह तिरंगा है ||

बापू का कफ़न , चाचा का तिलक ,आज़ाद ने खून दे सींचा है

चाहत की कलि खिलती है यहाँ खुशियों से भरा ये बगीचा है ||

है स्वर्ग यही जन्नत है यहाँ ,हर जीव यहाँ पर जीता है

हर नर में यहाँ पर राम बसे , नारी में बसीं यहाँ सीता है ||

चरित्र दिखा रामायण से , जीवन को बताती गीता है

भक्ति को सिखा हनुमत ने यहाँ भगवान् को सबसे जीता है ||

सूरज भी जिसे करता है नमन , और जलधि चरण को धोता है

देवों की धरा इस धरती को , ये जग पाने को रोता है||

अब देश मुझे वो लगता नहीं शायद जो पहले दिखता था

थी राम राज्य की सोंच मगर , हर पल यहाँ रावन दिखता है ||

साधारण जन की बात क्या हो , हर ख्वाब यहाँ पर बिकता है

था प्यार कभी संसार यहाँ , अब प्यार यहाँ पर बिकता है ||

ये वक़्त हमारा है अब से , कर्त्तव्य हमारा होता है

करना है मुक्त गरीबी से , बनना हमे विश्वविजेता है ||

आओ अब हम सब प्राण ये लें , हो राष्ट्र सेवा जीवन अपना

कर्त्तव्य परायण हो हम सब , करें देश का हर पूरा सपना ||

Wednesday, July 20, 2011

इश्क में तेरे हम कायल ही रह गए
सारा जहाँ मर गया हम घायल ही रह गए
मुद्दत-ए-आरज़ू दिल में तेरे दीदार की है बस
तमन्ना दिल में रह गयी और हम तनहा रह गए ||

Tuesday, July 19, 2011

कुछ बातें

कुछ बातें थी जो अपनी वो बातें पीछे छूट गईं

खट्टी मीठी आवाजों की बस यादें हममे छूट गईं

तुमसे न बिच्चादने की चाहत हर लम्हा दिल बसी रही

जीवन क कटीं संगर्ष में अब तेरी आहात पीछे छूट गईं ||

वो काली काली सी आखें जो हमसे बातें करती थीं

जब चले प्रेम की पुरवाई ख़ामोशी बातें करती थीं

कुछ न कह कर सब कहती थीं जब हमसे रूठा करतीं थीं

वो प्यार भरी वो मस्तानी जो रातें थीं वो छूट गईं ||

जब यारों का था संग हमे ख़ामोशी हमसे डरती थी

खुशियाँ रहती हर दिल में तब आखें न किसी की रोतीं थीं

चुप कभी नहीं रहता था मैं प्रेषण सभी को करता था

वो चिल्लाने वो गुर्राने की आदत थी वो छूट गई ||


Friday, May 6, 2011

यादें

हर बात ख़ुशी की थी उस पल ,हर बात सुहानी लगती थी ,बस प्यार भरा था गुलशन में ,हर रात सुहानी लगती थी |इकरार कभी करते तुझसे , इनकार भी खुद से करते थेतेरे साथ बिताते हर पल की वो याद सुहानी लगती है |उम्मीद तुझी से थी अपनी , विशवास भी तुझपे करते थे ,कुछ बात अजब सी जब होती , बस नाम तुम्हारा लेता थे |जब याद कभी घर की आती , बाहों में तुम्हे भर लेते थे ,तब प्यार तेरा पाकर खुद को नींदों में कहीं खो देते थे |परिवार बना था कुछ अपना जब दूर हम घर से रहते थे ,हर सुख क पल हम साथ जिए , दुःख को हम बांटा करते थे |जब प्यार किसी से होता था , तब यार चिढाने लगते थेफिर छोड़ क जाने के उसके सब मिल क सुनांने लगते थे ||हर पल में सदी हम जीते थे , हर नाव पुराणी लगती थीतुम साथ मेरे जब तक रहते , मझधार पुराणी लगती थी |ये बात नहीं सोंची उस पल ऐसा भी इक दिन आता हैजब छोड़ के जाना तुम सब को मरने के बराबर लगता है |रोने को तरसता है ये मन आँखों में भी पानी रहता हैपर तोड़ नहीं सकता खुद को ये बांध पुराना लगता है |ये बात कोई कल्पना नहीं , मेरे दिल की कहानी कहते हैजब रात के साए मुझसे तेरी यादों की कहानी कहते है |भगवान् मेरा मुझे माफ़ करे , ये पाप मैं ऐसा करता हूँउपर वाले से भी ज्यादा मैं तुझपे भरोसा करता हूँ |उम्मीद यही ये दुआ है मेरी तेरा साथ मुझे हर बार मिलेजिस मुल्क जियूं में जहाँ भी रहूँ , बस तेरे जैसा यार मिले |ये बात यहाँ रूकती ही नहीं बड़ी दूर तलक ये जाती है ,तेरे साथ की खुशबू यार मेरे जीवन को स्वर्ग बनती है ||

Saturday, April 30, 2011

क्यूँ

क्यूँ दिल चाहता है तुमको ,क्यूँ मैं तुमपे मरता हूँ
क्यूँ तेरे दीदार की हसरत लिए बस जीता हूँ
क्यूँ तेरी चाहत का हर लम्हा मेरी सांसों में समाया है
क्यूँ कोई उम्मीद आज भी मुझे तेरे दर पे ले आया है |

क्यूँ ये लगता है की जीना नामुमकिन है तेरे बिना
क्यूँ मरना भी नसीब नहीं हो पाया है ,
क्यूँ सिसकियाँ भरता है ये दिल ,क्यूँ ये कभी रो नहीं पाया है
क्यूँ हर मौहौल में इसने खुद को गुमसुम ही पाया है |

क्यूँ हर लम्हा इक कशिश महसूस करता है ये दिल
क्यूँ तुझपे इसे इतना प्यार आया है
क्यूँ ये हर चेहरे में ढूंढता है ये तेरा अक्स
क्यूँ ये शाम तेरी आगोश में गुजरने को इतना तडपाया है |

क्यूँ इक डर सा लगता है तुझे खोने का
क्यूँ भीड़ में भी इतनी तन्हाई है ,
क्यूँ मैं प्यार करता है तुमसे इतना
क्यूँ मेरे जीवन की लगती तू परछाईं है |

क्यूँ मेरी तकदीर ज़ालिम है मुझपे इतनी
क्यूँ मैंने आज तक हिम्मत कभी नहीं जुटाई है ,
क्यूँ प्यार करता हूँ मैं तुमसे कितना
ये बात आज तक मैंने तुमसे छुपायी है |

आज दिल ने मेरे मुझे ये हकीकत बताई है
कि तुही सुबह है मेरी ,और तू ही शामे तन्हाई है ,
कि जी नहीं सकता हूँ मैं तेरे बिना यहाँ
क्यूंकि मेरी जान तुझमे समाई है ||

Saturday, January 22, 2011

आशिकी

कभी तो याद करो ऐसे
कि आँखों में नमी न हो
हमसे तुम मिलती रहो यूँ
कि सांसों कि कमी न हो
कभी भी दूर न हो तू
यही दुआ है मेरी
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो ||

हम यूँही मिलते रहे
ख़्वाबों कि तस्वीरों में
लड़ते रहते थे अपनी
अनकही तकदीरों से
पर कभी मिल न सके हम
यही गिला बस है
बाँध रखा था हमें
राहों कि जंजीरों ने
इतनी मुद्दत से थे चाहा तुझे
जब तू ही न हो
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो ||

रोका करते थे मुझे
सारे ज़माने वाले
रोका करते थे मेरे
पैर में पड़ते छाले
पर तेरे इश्क ने मुझको
इतनी ताकत बक्षी
आँख कर बंद किया पार
कितने जलते नाले
अब तेरे इश्क से बढ़कर
कोई इबादत न हो
बा खुदा बिन तेरे
अब मेरा ये जीवन न हो |||