Thursday, November 11, 2010

तेरे बिन

हर शाम दिल में तन्हाई थी
मन तो खुश था मगर
दिल में एक उदासी सी छाई थी
जाने कितने दिनों पर
चली वो पुरवाई थी
न जाने कितनी मुद्दतो क बाद
याद तुझे मेरी आई थी|

न जाने कब से था
दिल को इंतज़ार तेरा
हर दिन रहता ये बेचैन
हर पल बेक़रार बड़ा
भंवरे का गुंजन था नीरस
फूलों में ज़हर भरा |

पर तुझे याद कर गुजारे थे
ये दिन और ये रात
और तेरी याद में बीते
न जाने कितने बरसात
पर तेरी खबर न आई
फिर भी था एक विश्वास
तुझसे मिलने की थी
मेरे होठों पे अधूरी प्यास |
पर उस विश्वास से भी
नाता टूट गया था
जब से हिचकियो ने भी मेरा दामन
छोड़ दिया था ||

पर आज एक उम्मीद की किरण
फिर से जग आई है
आज फिर से मुझे
हिचकियाँ आई है
आज मन भी खुश है मेरा
और दिल में बजी शहनाई है
भवरों को गुंजन में मिठास
और फूलों में खुशबु भर आई है
ऐसा लगता है जीवन में मेरे
खुशियाँ फिर से भर आई है
और आज ऐसा लगता है ज़ालिम कि
फिर से तुझे मेरी याद आई है |||

2 comments:

  1. hats off to you..!!!
    bahut sahi..!
    aaj tak ki best hai ye!!!

    truly, very very good.!!

    aisa lagta hai yeh true feelings hain..! kya ye sach hai ????
    do reply...!!!

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