Wednesday, July 21, 2010

ज़िन्दगी

चार पल की ये कहानी है हमारी ज़िन्दगी
उड़ता बादल बहता पानी है हमारी ज़िन्दगी
चाहतो का है भरा सैलाब हर एक पल यहाँ
जी लो जी भर के सुहानी है बड़ी ये ज़िन्दगी |

गुनगुनाते पक्षियों सा लहलहाते खेत सा
सरसराती पवन जैसा चिलचिलाती धूप सा
है कभी नदिया का पानी ,या कभी दरिया का जल
और कभी मरू का है बालू ,या कभी वृक्षों का फल
है असीमित राह इसमें है असीमित ख्वाहिशे
ख्वाहिशो को पूरा करके करलो ये जीवन सुखी
फिर लगेगी मोतियों क सेज जैसी ज़िन्दगी
जी लो जी भर के सुहानी है बड़ी ये ज़िन्दगी |

है कभी बारिश का पानी ,या कभी सुखी धरा
और कभी कड़वा करेला ,फिर कभी मीठा घड़ा
क्यूँ कभी हमको रुलाती ,क्यूँ कभी मायूस करती
फिर अचानक ख्वाहिशो को पूरा कर पल में हसाती
खिलखिलाती मुस्कुराती चाह्चाती ये रहे
हर एक पल इसके अनोखे ,हर एक पल इसके नए |

चाहता हु इस अनोखी ज़िन्दगी को कैद कर लू
पर कभी मुट्ठी में न आती हवा सी ज़िन्दगी |

मौत भी इसका ही पहलु जो छुपी रहती कही
लुक्का छुप्पी खेलते जिससे हर एक पल है सभी
पर किसी को ये न दिखती ,न कभी किसी ने सुनी
एक दिन इससे अचानक ही है मिलती ज़िन्दगी
उस समय न काम आता कोई रिश्ता न ही धन
मौत की आगोश में ऐसी तड़पती ज़िन्दगी |

मैं यही कहता हु यारो ज़िन्दगी रोमांच है
लुत्फ़ लो हर एक पल का अद्भुत मिला ये चांस है
प्यार से भर लो इसे नफरत के काबिल है नहीं
शिद्दतो से है मिली शायद मिले ये फिर नहीं |

|शशांक कुमार पाण्डेय |